बचपन के वो दिन निराले। याद आते हैं दिन सुहाने। पापा की डांट वो भाई का प्यार। रूठ कर मेरा रोना। वो माँ का मुझे मनाना। रोते-रोते वो माँ के साथ फिर हंस जाना। वो बीते दिन, वो बिछरी यादें। याद आते हैं दिन सुहाने। दोस्तों के साथ खेलना। वो खेल-खेल में लड़ जाना। जो कोई पूछे क्या हुआ। तो बिन बात के मोह चिढाना और हस जाना। याद आते हैं दिन सुहाने। सुबह देर से उठना। उठ कर फिर रो जाना। बचपन के वो दिन निराले। याद आते हैं दिन सुहाने। वो पकड़म- पकड़ाई, वो छुपन-छुपाई। याद आते हैं खेल पुराने। शाम को दोस्तों से मिलना। मिलकर शोर मचाना। दिन थे वो बड़े सुहाने। ना पढ़ाई की चिंता। न जल्दी उठने के बहाने। सोचा करते थे हम तब। कब हम बड़े होंगे। सुबह -सुबह नोकरी पर जाएंगे। क्या मालूम था, इस दिन के लिए। सुहाने दिन वो गवाएंगे। याद आते हैं दिन सुहाने। लेलो मेरी दौलत सारी। देदो वो दिन सुहाने। याद आते हैं वो दिन निराले। वो पहले प्यार का छुप कर दीदार। बिन इज़हार उसे अपना बताना। चाहत ऐसी थी निराली। याद आती है बचपन की थाली। लोटा दो वो बचपन के साथी। वो दिन पुराने। याद निराली। भूल नही सकते वो दिन। हमे सताती हैं बछरी यादें। वो माँ के साथ हँसना। पापा से वो डरना। बचपन के वो दिन निराले। याद आते हैं दिन सुहाने। पापा की डांट वो भाई का प्यार। रूठ कर मेरा रोना। वो माँ का मुझे मनाना। रोते-रोते वो माँ के साथ फिर हंस जाना।   (अजय किशोर) Mob. 9999191546