1) हर मोड़ पर मिले हमें जज़्बातोन से खेलने वाले।
ज़खम हमारे मज़ाक बन गये।
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2) तुझे प्यार मैं अपना कैसा दिखाउं।
तु है मोहब्बत मेरी ये केसे जताउं।
जो तु कहे मैं वो कर सकता हुं।
प्यार का अहसास कराने के लिये
मैं हद से गुज़र सकता हुं।
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3) खामोशि की भी अपनी जुबां होती है ।
इश्क़ की राहों में मुश्किलें तमाम होती हैं।
कायम करना चाहते हैं सब अपनी मोहब्बत ।
पर अधूरी मोहब्बत ही तो मिसाल होती है।
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4) खफा हैं हम तेरे सताने से।
वफ़ा है ये मेरी ज़माने से।
जो तु मुझे ना मिली।
अर्थी उठेगी हमारी अब मैखाने से।
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5) Mere sapne the bade bade.
mahnat ki na koi.
pathhar murat kese bane.
jub chot sahi na hoi.
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6) जिंदगी भी हमे ये किस मोड़ पर लायी।
चले थे अकेले इस सफर में।
मंज़िल भी हमसे अकेले ही मिलने आयी।
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7) जिंदगी का सफर यूँही कट जाएगा।आज दुख है साथी कल सवेरा नज़र आएगा।
हताश ना हो तु ऐ मुसाफ़िर।
कल सूरज तेरा भी जगमगायेगा।
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8) सफर में हमराही मिले हमें बहोत ना मिला कोई हमसफर।
सफर चलता रहा राही निकलते रहे।
रह गये बस हम और सफर।
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9) दुखी हम हो गये उनके आज़माने से।दिल ने कहा प्यार की यही परिभाषा है।परेशान ना हो ज़माने से।
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(अजय किशोर)
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