आज कल गांव वाले पूछते हैँ
क्यों ऐसी हवा में जीते हो
पसर रहा धीमा जो जहर
क्यों इतनी शिद्दत से पीते हो।
क्यों भाग जाते नही तुम
इस शोर शराबे से कहीं दूर
क्यो ठहरते नही थक कर
क्यों तुम दिखते नही मजबूर।
जवाब बस इतना सा है मेरा
ये शहर अकेला नहीं मैला हुआ
मेरा वजूद भी इसका भागी है
बीच में इसे छोड़ना गँवारा नहीं।
अजय झा **चन्द्रम्**

