खोखली चाहतें's image
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इस तेज दौड़ में
बेतुके से होड़ में
बेबाक दौड़ते हैं
पल भर न सोचते हैं।


पैदा हुए थे इन्सान
पर् इन्सान नही रहे
खोखली सी चाहतों में
भेड़ बकरी बन गये।


रिश्तों को कर किनारे
बस लाभ ढूंढते है
दुसरो कि टीस मे
अपनी जीत देखते हैं।


कबसे कहे न जाने
भ्रस्टाचार गरीबी सहते
पर उफ्फ

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