लिखें इबादतो में हमने 
वतन के नाम हर पन्नें
हां सजदा उनका करते हैं
जो वतन के नाम मिट गए ।

जिंदा है लिए ये शौक
काश वो शाम आ जाए 
वतन के इश्क में मुकर्रर 
हमारा भी नाम आ जाए ।

है जश्न-ए-आज़ादी का समा
हर बेड़ियों को तोड़ दो 
शहीदों कि सर जमीं पर 
रूह को तिरंगे से जोड़ दो।

अजय झा **चन्द्रम्**