ये पाप-पुण्य, ये पूर्ण-शुन्यये सत्य-अस्त्य, ये भय-निर्भयसब उद्गम तुम से हि पाते हैफिर लौट तुम्ही को आते है।अजय झा **चन्द्रम्**
ये पाप-पुण्य, ये पूर्ण-शुन्यये सत्य-अस्त्य, ये भय-निर्भयसब उद्गम तुम से हि पाते हैफिर लौट तुम्ही को आते है।
अजय झा **चन्द्रम्**