दिवाली का दीपक हूं
आशाओं का रुपक हुं
मै जन्मा हूं जलने को
अन्धकार को हरने को
मै सुचक हुं शुभ का
शायक हूं लाभ का
मै आरंभ हुं अनुष्ठान का
आरती या गौरव् गान का
मैं मिट्टी पानी से सिंचित हूं
अग्नि वायु से पोषित हुं
मैं जीता हुं तुम में
तुम्हारे हर ललक में
मैं जय का प्रतिक हूं
लघु पर निर्भिक हुं
मै बाती संग बद्ध हूं
तम के सदा विरुद्ध हूं
ये अहंकार नही मेरा
दमकता अभिमान है
हां दिवाली पर्व् नहीं
मेरा गर्व और सम्मान हैं
अजय झा **चन्द्रम्**

