इस पावन वासंती बेला मे 

कल तक था मैं झूम रहा

पर दीदी के जाने से 

बन शोक् संगी मैं घूम रहा


ऐसा लगता है ईश्वर ने 

बोला वसंत को जाने को

और प्रिय स्वर कोकिला को

संग गंध पुष्प लाने को


अब जब जब वसंत आएगा

दीदी कि याद दिलाएगा

उनके गीतों से मन को

हर भावों का बोध कराएगा।


मेरे मन मे जब जब 

स्वर कि अनुभूति होगी

माँ शारदा संग संग 

दीदी कि यश कीर्ति होगी