महिसासुर के अत्याचार का मर्दन हुआ
दशानन के अहंकार का दहन हुआ
संदेश था जगत को सबके कल्याण का
त्याग, सत्य, प्रेम, और स्वाभिमान का
जन आह्लादित हुए, मूर्तिया बनाई
भांति-भांति के त्योहार भी बनाये
जगराता किए, आरती गाये, भोज हुए
व्रत किया, मंदिर गये, संदेश भूल गये
और समाज में, कुरीतियों पर चुप रहे
नारी का अपमान देख धृतराष्ट्र बन गये
हम धार्मिक कम, उन्मादी ज्यादा हो गये
ईश्वर को बना ढाल, आसुरी पैरोकार बन गये ।
अजय झा **चन्द्रम्**

