इस दफ़ा मैनें ना रखी शर्त

उन से सिर्फ़ मुस्कुराते हुए मुझ से मिलने की,

इस दफ़ा मुझे ख़बर थी की

उन्हें जी भर के रोने को मेरा कांधा है चाहिए


इस दफ़ा मैनें ख़ुद पे भी ना

लगाई पाबंदी मुस्कुराते हुए उन से मिलने की,

इस दफ़ा मुझे ख़बर थी की

मुझे भी हमदर्द की बाहों का सहारा है चाहिए


- अजय दत्ता