ग़ालिब लिखूं या गुलजार लिखूं

या फिर ये हाल-ए-कारवा लिखूं

दो पल का में शायर हूं

और, जायदा मै क्या लिखूं


मस्ती में डूबा वो रंगमंच लिखूं

या पतझड का हाल लिखूं

बसंत का श्रृगार रचू्

या फिर चोमास का सार लिखूं

मै पल दो पल का शायर हूं

और, ज्यादा क्या लिखूं


उसकी होठो की मुस्कुराहट लिखूं

या फिर अपनी वेदना लिखूं

उसकी जिहुजुरी लिखूं

या अपने मन की बात लिखूं

दो पल का मै शायर हूं

और, ज्यादा मै क्या लिखूं


यादों का काफिला लिखूं

या सुनसान सड़क की बात लिखूं

अपनी आलोचना लिखूं

या उसकी प्रसंशा लिखूं

पल दो पल का शायर हूं

और,  ज्यादा मै क्या लिखूं


भटके पथिक की  व्यथा लिखूं

या आसमान का गुड़गान करू

उसकी खूबसरती का राज लिखूं

या अपनी बदहाली का सितम लिखूं

पल दो पल का शायर हूं

और, ज्यादा मै क्या लिखूं


असमंजस में हो , क्या लिखूं

कल लिखो या आज लिखूं

उसकी बातो का राग लिखूं

या अपनी मन कि बात लिखूं

अब तुम ही बताओ मै क्या लिखूं?

पल दो पल का शायर हूं

और, ज्यादा मै क्या लिखूं?