ग़ुरबत से कैसी शर्मिंदगी,
इमां की दौलत है तो तू अमीर है,
करता रहेगा तेरी ज़िन्दगी के अँधेरो को रोशन,
ग़र वजूद में तेरे रोशन ज़मीर है ।
दुनियां कमाने में मसरूफ़ है जो,
दुनिया की नज़र में है बेहद अमीर ,
न इमां है न किरदार-ए-सख़ावत,
दिल से कमज़र्फ और आमालों से फ़कीर ।
फ़िक्र कर आख़िरत की वक़्त कम है,
न बेरुख़ी रख किसी से वक़्त कम है,
दो बात मोहब्बत की कर ले सब से,
न जानें कब क़यामत हो वक़्त कम है।
ग़ुरबत = ग़रीबी (Poverty)
मसरूफ़ = व्यस्त (Busy)
सख़ावत = उदारता ( Generosity)
कमज़र्फ = ख़राब/बेवकूफ़/नीच ( Vile/Silly/Mean)
आमाल = कर्म (Karma/Deed)
ऐजाज़ اعزاز


