नफरतों की आवाज़ों का दमन चाहता हूँ,

देश के हर कोने में सब्ज़ चमन चाहता हूँ,

मैं थक गया हूँ अन्याय के शोर शराबे से,

मैं आम हिंदुस्तानी हूँ अमन चाहता हूँ।


किसानों की उन्नति और प्रगति चाहता हूँ,

जवानों की शहादत की क़द्र चाहता हूँ,

ग़रीबी से देश को स्वतंत्र चाहता हूँ,

मैं आम हिंदुस्तानी हूँ अमन चाहता हूँ ।


मज़हबी फसादों का अंत चाहता हूँ,

भाईचारा पहली पसंद चाहता हूँ,

नेताओं की चोरबाज़ारी ख़त्म चाहता हूँ,

मैं आम हिंदुस्तानी हूँ अमन चाहता हूँ।


सच की आवाज़ हो बुलंद चाहता हूँ,

न्याय मिले सबको यही हरदम चाहता हूँ,

इंसानियत हो पहला धर्म चाहता हूँ,

मैं आम हिंदुस्तानी हूँ अमन चाहता हूँ।


ऐजाज़ اعزاز