आज़ाद हूँ मैं,
आज़ादी के लिए मर मिटे जो,
वो इंक़लाबी उन्माद हूँ मैं
सच बोलने का हक़ है मेरा,
जो सच दबाने से भी न दबे,
वो जज़्बाती संवाद हूँ मैं,
आज़ाद हूँ मैं
ख़ामोशी मेरी फ़ितरत नहीं,
ख़ामोश करना मुझे मुमकिन नहीं,
ग़र ख़ामोश है सब जहाँ में तो अपवाद हूँ मैं
आज़ाद हूँ मैं
ये वतन मेरा हक़ है,
इस वतन पर सबका हक़ है,
ख़ातिर हक़ की लड़ाई के बर्बाद हूँ मैं,
आज़ाद हूँ मैं।
ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं गँवारा मुझे,
ज़ुल्म के खिलाफ़ जो उठे वो आवाज़ हूँ मैं,
आज़ाद हूँ मैं।
सीने में मेरे धधकते है इंकलाब के शोले,
पानी से भी न बुझे वो आग हूँ मैं,
आज़ाद हूँ मैं ।
ऐजाज़ اعزاز


