"ॐ नमः शिवाय "
इकाई भी वहीं
अंत भी वहीं हैं तो,
आदि भी वहीं
जड़ भी वहीं हैं तो,
वट वृक्ष भी वहीं
धरा पर भी वहीं हैं तो,
धरा से परें भी हैं वहीं
चेतना का अर्धांश भी हैं
मन की पूर्णता भी वहीं
पक्ष में भी वहीं हैं तो
विपक्ष में भी हैं वहीं
असुरों में भी हैं वो तो,
देवों में भी हैं वहीं
माया में भी हैं वहीं
तो, माया से परें भी वहीं
पंच तत्त्वों में भी हैं वहीं तो,
पंच परमेश्वर भी हैं
जर से परें हैं तो
जर में भी हैं वहीं
क्रोध में भी हैं वहीं तो,
मौन अभिव्यक्ति भी वहीं
पुरुष में भी हैं तो,
स्त्री में भी हैं वहीं
अमृत भी हैं उसकी वाणी में तो,
कंठ में विष रखता हैं वहीं
राम का अनुशीलन भी हैं तो ,
कृष्ण का हैं ज्ञान भी वहीं
शब्द भी हैं वहीं तो,
शब्दों का अर्थ भी हैं वहीं
प्रारंभ में भी हैं वहीं तो,
प्रारब्ध में भी हैं वहीं
अनन्त अंत के मध्य का
अहर्निश सत्य भी हैं वहीं
जन्म में भी वहीं हैं तो
मृत्यु में भी हैं वहीं
घर मंदिर आलय में हैं वहीं तो
शमशान में भी हैं वहीं !!
शेष न रहें जिसमें कुछ भी
अशेष शिव हैं वहीं !!
~गौरव वशिष्ठ "अहर्निश'

