तुम्हारे साथ मेरा
वहीं रिश्ता है ...
जो रिश्ता ....
पक्षी पंखों से
पेड़ पत्तियों से
सागर नदी से
धरती बारिश से
जेठ धूप से
सावन बारिश से
भादो हरियाली से
भ्रमर कुमुदिनी से
षोडशी श्रृंगार से
यौवन सुंदरता से
युवा आजादी से
कामगार तन्खवाह से
हृदय धड़कन से
मन मोक्ष से
शरीर पंचतत्वों से
रखता है !!
एक पंक्ति में कहूं तो ....
तूम मेरा दर्शन हो !!
~अहर्निश

