सांत उत्साहित बसंती हवाएं
चुपके से आती धूप
यह बादलों का गर्जना और फिर बरसना
अपने में कुछ बयां करती हैं।

या मेंढ़कों का टरटराना
कीटो का किटकिटाना
भीगे चिडियों का चहचहाना
अपने में कुछ बयां करती हैं।

नीले अंबर से
भूरे माटी को चुमती ये मोती बिंदु
और नादियों में इनकी चंचलता
अपने में कुछ बयां करती हैं।

ये टुपुर टपुर
बरसती नुपुर
एक अनगाई राग में
बहकती धुन भी
अपने में कुछ बयां करती है।

ये सावन की हरियाली,
ये मौसम भिगायली
सुनहरे धूप में
ये भी कुछ बयां करती हैं।