
महक ये तुम्हारी चंदन चंदन,
गेसू है मानो सुंदर कोई वन,
नदियों के रुख बदलने लगे हैं,
देखती हैं जब तुम्हारा यौवन ।
हैं नैन तुम्हारे बड़े ही चंचल,
झुके तो बारिश उठे तो बादल,
समझा के
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महक ये तुम्हारी चंदन चंदन,
गेसू है मानो सुंदर कोई वन,
नदियों के रुख बदलने लगे हैं,
देखती हैं जब तुम्हारा यौवन ।
हैं नैन तुम्हारे बड़े ही चंचल,
झुके तो बारिश उठे तो बादल,
समझा के