मेरी चाहत है, तुम सिर्फ तुम मेरा सुकून बनो,
मेरे जज़्बात की रगो में बहता हुआ खून बनो,
मेरे अपनो की वफा ने मेरा तमाशा बना रखा है,
तुम मुझमें समा जाओ,मेरे वजूद का तावुन बनो,
खाली है दामन लिए किस्मतो से रोज लड़ती हूं,
जंग ए ज़ीस्त में महबूब मेरे तुम मेरा जुनून बनो,
दिल का हर ज़ख्म मेरे हमराज तुमको दिखाएंगे,
देखना मैं क्यों कहती थी की तुम मेरे माजून बनो,