मैंने आज फिर से एक अधूरा सपना देखा है
मुह मोड उससे हर बार हार कर पलट के देखा है
बिना झपकाए पालकों को सदियों से
इन भीगी आंखो ने नाजाने क्या क्या देखा है
साथ होकर जो धीमे धीमे से बंट रहा है
मैंने अपने हाथ से अपने अंगो काटते देखा है
असत्य के बाज़ार में सत्य के रंगों को
मैंने आशाओं की डिब्बी में बिकते देखा है
कभी जो बहते थे अश्रु हर मानव की पीड़ा में
मैंने उनको आज मज़हब के रंग में मिलते देखा है
गरीबी के खिलाफ लड़त देखा है लोगों को
मैंने उन्ही को गरीबों का रोजगार जलाते देखा है
जिस रफ्तार से गिर रहा जीवन का मूल्य यहां
मैंने लाशों के कारोबार उतना ही फलता देखा है
सोचा कि पलके झपकाके कहदूं खुदसे
कि सिर्फ एक बुरा सपना देखा है
पर मैने अपने बेरंग अश्रु को
किसी और के बहते लहु से लाल होते देखा है
सोचा कि निराशा से बंद कर लूं इन आँखों को
पर कई बार उम्मीद को अपनी ओर मुस्कुराते देखा है