है ख़्वाहिश मिरी ये पुकारो कभी तुम

सुनो तो! कहो भी! अरे तुम! अजी तुम!  

---------------------

भटकता रहा मैं यहाँ वाँ हमैशा

मेरा दिल गया वाँ जहां भी गई तुम 

---------------------

मयस्सर नहीं इक घड़ी चैन मुझको

मुझे याद आती रही हर घड़ी तुम 

---------------------

किराया तो दो कुछ महब्बत का मुझको,

जो मुद्दत से मेरे ही दिल में रही तुम

---------------------

हुआ क्या है तुमको मुझे तुम कहो तो

जरा देर पहले थी अच्छी भली तुम

---------------------

जहाँ भी में जाऊँ तेरा साथ चाहूं

मुझे हो गई हर जगह लाज़मी तुम

---------------------

जो अव्वल नहीं ना सही मेरे हमदम

मगर हो मोहब्बत मेरी आख़री तुम

---------------------