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जात


बात जात की ज़रा नाज़ुक है। हाथ से छूना नहीं मैली हो जाती है। सदियों से धो रहे हैं जो उनके नामों से नहीं उतरती। मनमानी कराने वालों का झट साथ छोड़ जाती है। बात जात की ज़रा नाज़ुक है.. .. सिर्फ पँचों की पकड़ में आती है।

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