बहुत बांट लिया इंसानों को जाति और धर्म में
अब ना बांटो इनको अनेक रंग में
यह रंग तो सिर्फ एक छलावा है
जिसकी आंखें न होती
उसके लिए तो सब कुछ काला है,
सौभाग्य की बात है कि हम सब देख पाते हैं
अलग अलग रंगों को पहचान जाते हैं,
खूबसूरती देखकर तो कोई भी फिसल जाता है,
जिनसे हो दिलों का मेल,
असल में तो उन्हीं से गहरा नाता है
जरुरी तो नहीं कि ये भेद पीढ़ी दर पीढ़ी चलाया जाए,
क्यो ना पूजा में काला और शादी में सफेद पहनकर
इन रंगों का भेद मिटाया जाए।
इन रंगों का भेद मिटाया जाए।।


