तू मेरे होठों की मुस्कान!
तो मैं तेरी मुस्कान की वजह बन जाऊँ।
तू मेरे शरीर की जाँ!
तो मैं तेरे शरीर की परछाई बन जाऊँ।
और अगर तू मेरी मंज़िल!
तो मैं इस मंज़िल का रस्ता बन जाऊँ।
डूब जाऊँ सूरज की तरियाह,
अगर तू बन जाए जुगनू की रोशनी की तरियाह।
और जगमगा दूँ मैं ये दुनिया,
अगर तू दे साथ सूरज की किरण की तरियाह।
घोल दूँ मिठास इस जिंदगी में कुछ इस तरियाह,
अगर तू घुल जाए मुझ में
शरबत में मिठास की तरियाह।
- आदित्य खटाना


