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क्या देश ? क्या काल ? क्या परिस्थिति ये सब से लेखक का क्या ? 
कौन से देश के किस शहर में कौन से काल में बैठ कर मैं ये लिख रहा हूँ मुझे इसका ज्ञात नहीं , मुझे तो इसका भी ज्ञात नहीं की मैं लिख क्या रहा हूँ । इतना मालूम पड़ रहा है की की हाथ की उँगलियाँ ज़रूरत से ज़्यदा तेज़ चल रही हैं , कोई एक टुकड़ा पकड़ी हैं कस कर उँगलियाँ जिस पे दबाव डाली चली जा रहीं हैं 
मानो कहानी लिखने का ज़िम्मा उस विचारी कलम का हो । 

चाय बनाने की स

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