नादान दिल खामोश था

जमाने से कोसों दुर था

क्या कसूर इस मासूम का था

ना विदेश घुमकर आया था

ना घुमने जाना था

एक विषाणु उसे क्या डरता

जिसका आशियाना माँ

का आंचल हुआ कराता था

उसे जमाने से क्या जताना था

यूँ कोसों दुर चलकर

बस्स अपने घर जाना था।

-adi