अरमानख्वाबों के परिंदे झिलमिला उठेआंखोंमें बस कर तन को खिला उठेदेख ख्वाब रोज नएउसे पूरा करने तड़प उठे।आदिनाथ सवराते
अरमान
ख्वाबों के परिंदे झिलमिला उठेआंखोंमें बस कर तन को खिला उठेदेख ख्वाब रोज नएउसे पूरा करने तड़प उठे।आदिनाथ सवराते