यह साली हट्ठी है ( हट्ठी - ज़िद्दी )
तुम्हारी ही तरह
पोटली में बाँध कर इसके कुछ टुकड़े
फेंके थे मैकलॉड गंज के पहाड़ो पे
कुछ को जला कर, राख बना कर
बहाया था गंगा में
जो थोड़ा बचा था उसे रगड़ कर
भूसा बना कर
कैटरीना तूफ़ान में उड़ाया था
लेकिन ये साली हट्ठी है तुम्हारी ही तरह
आ गई है फिर से
पैरों में घुंघरू बांधे
कलाई में एक अकेली बाली पहने
लाल चुनरी ओढ़ कर
दस्तक दे रही है
दरवाज़े पे
ले जाओ ना तुम अपनी यादों को
वहीँ जहाँ तुम हो।।।