ये जज़्बात, ये सोच और ये लगन अब हुई है नई-नई, मेरी सभी गलतियों की साफ-सफाई अब हुई है नई नई।। सभी जनों के आशीर्वाद से पाया है हर पल एक नया मुकाम, विकसित दिमाग के इस्तेमाल से जगह बनाई है अब नई-नई।। शायद यह नौजवानी का ही असर है... मेरे व्यवहार में झिझक आई है नई-नई।। दिल तू अभी से सब कुछ क्यों लुटा बैठा है अभी तो उनसे पहचान हुई है नई-नई।। इतनी जल्दी उन्हें मत दो तमगा ईमानदारी का अभी तो जिंदगी बनाई हैं नई नई।। न जाने कितने संघर्षों से पार होना पड़ेगा पर फिर भी अपनी सोच को अब मैंने बनाई है नई-नई।। मैंने देखा खुशनसीब है ये जमाना क्योंकि इन्शान ने खुद बनाई है अपनी दुनिया नई नई ।। ये जज़्बात, ये सोच और ये लगन अब हुई है नई-नई, मेरी सभी गलतियों की साफ-सफाई अब हुई है नई नई।।