हां , मैं तुझसे मोहब्बत करता हूं
लेकिन कहने से डरता हूं
ये कब हुआ , कैसे हुआ
मुझे ये पता न चला ,
मैं सिर्फ तुझसे मोहब्बत करता हूं
मैं छोड़ अपने घर का रस्ता
तेरी ओर खुद को मोड़ लेता हु
दिख जाए तेरा चेहरा कहीं
ये सोचकर अपना दिल बहला लेता हु
हां, मैं सिर्फ तुझसे मोहब्बत करता हूं
कभी नैन से नैन मिला ना पाया
तेरे सामने नजरे उठा न पाया
जब तू पास से गुजरती थी
तब भी तुझे बता ना पाया
लगता था जैसे गया हू मर
जिस दिन तेरा दीदार ना पाया
फिर भी ,मैं तुझ से मोहब्बत करता हूं
लेकिन कहने से डरता हु
