मैंने आयकर भी दिया, मैने जीएसटी भी दिया था।
मैंने तो अपने आधार को पैन से लिंक भी किया था।
निकला था मैं आज घर से दाल-रोटी की जुस्तजू में,
न मैंने कोई नशा किया, न मैंने कोई शराब पिया था।
सपनो के शहर में आज खो गए मेरे सारे संजोए सपने,
कुचल दिया गया मैं राजनीतिक स्वार्थो की भगदड़ में,
पहुंचा देना मेरी मौत की खबर मेरे घरवालो तक और,
आकर बता देना मेरे कब्र पर, मैने ऐसा क्या किया था।
कल मेरी चिता जलेगी या मैं किसी कब्र में दफ़न हो जाऊंगा।
इंतजार रहेगा तुम्हारे जबाब का।