सत्ता ने जात पात का गोला ऐसा फेका ।
शंकर की बूटी समझ कर खाएं उनके लोग।।
अब भृम फैलाने चले है उनके बूटी वाले लोग ।
उधर बैठी सत्ता उल्टे तावा पे रोटी सके ।।
लेखक आदर्श पाण्डेय


सत्ता ने जात पात का गोला ऐसा फेका ।
शंकर की बूटी समझ कर खाएं उनके लोग।।
अब भृम फैलाने चले है उनके बूटी वाले लोग ।
उधर बैठी सत्ता उल्टे तावा पे रोटी सके ।।
लेखक आदर्श पाण्डेय