तू राजा तू ख्वाज़ा करम का तकाज़ा
तुम्हारे ही अन्दर पूरा ही समंदर
खारे पानी को भी तू पी जाए गट - गट
तू झरने सूखाए,मैं चापा नल का स्वामी
जो लड़के बने है तेरे भक्ति गामी
एक दिन तो टूटेगी गन्दी गुलामी
धन - बल कुछ तो कसीदे सुना जा
तू राजा तू ख्वाज़ा करम का तकाज़ा
तू बरसो से है चाय पानी का भूखा
कसम भी खिला दू तू मानेगा झूठा
तू सपने दिखाए हवा में उड़ाए
पौधे से लेकर आसमां तक रिझाए
लगता है तू वादों का सूखा
नमस्ते तूने बन्दे नवाज़ा
तू राजा तू ख्वाज़ा करम का तकाज़ा
तू तम में भी झांके सूरत को निहारे
जबर के तरुण में तू बाले सवारे
तू फुर्ती में कुर्ते को बांहों में डाले
जब धंधे हो मंदे तू पांव पाखरे
तमस भी तेरा क्या ही बिगाड़े
ज़रूरत पे झूठे पन्ने लहराजा
फरेबी राजा - रानी तू सबको बना जा
तू राजा तू ख्वाज़ा करम का तकाज़ा


