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आज का पंछी

आज का पंछी, कल उड़ेगा।

फूंक फूंक के कदम रखेगा।

उम्र मे अदना,हाथ थमेगा।

चाहत है की बने मुसाफिर।

रोम -रोम मे भरकर काहिर।

बड़ा कर्मठी, बड़ा ही माहिर।

पर तीखे वो आवाज़ रखेगा।

आज का पंछी, कल उड़ेगा।

राह मे उसके आएगा रोड़ा,बाँह को उसके देगा मरोड़ा। 

नूतन चाल से गजब बढ़ेगा,धूल फांकते ऊपर उठेगा। 

मानवता के राह को पकड़े,खूब झुकेगा, नमन करेगा। 

सपने के ताकत को माना,सजग करे वो सबको जाना। 

भक्त तो देखो गाँधी का है,सरपट

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