आज का पंछी, कल उड़ेगा।
फूंक फूंक के कदम रखेगा।
उम्र मे अदना,हाथ थमेगा।
चाहत है की बने मुसाफिर।
रोम -रोम मे भरकर काहिर।
बड़ा कर्मठी, बड़ा ही माहिर।
पर तीखे वो आवाज़ रखेगा।
आज का पंछी, कल उड़ेगा।
राह मे उसके आएगा रोड़ा,बाँह को उसके देगा मरोड़ा।
नूतन चाल से गजब बढ़ेगा,धूल फांकते ऊपर उठेगा।
मानवता के राह को पकड़े,खूब झुकेगा, नमन करेगा।
सपने के ताकत को माना,सजग करे वो सबको जाना।
भक्त तो देखो गाँधी का है,सरपट चाल को अपना माना।
आँख छुपाकर रोया हरदम,कदम-कदम पर आग भरेगा।
हार को समझे तिफ़्ल बराबर, गिरकर अदब से तुरत उठेगा।
बड़े ज्ञान की बातें करता, आशा की आवाज़ बनेगा।
अभी तो अंदर बहुत छुपा है,देखो क्या क्या वक़्त बचा है।
वादा करके पूरा करना, रग-रग मे उसके भरा है।
एक बार मे सारे सपने, पीढ़ी के संपूर्ण करेगा।
बड़े दीवाने होंगे उसके, अदब से सबका हाल सुनेगा।
होंठों पर मुस्कान समेटे,सभी कष्ट का अन्त करेगा।
आज का पंछी, कल उड़ेगा।
~ आदर्श कुमार


