हर वक़्त अपने हालात पर रोता रहा हूँ मैं,
जो था ही नही वो बोझ भी ढोता रहा हूँ मैं,
नासमझ था जो जी नही जिंदगी हँसकर मैंने,
खुदा की बख्शी नेमत को खोता रहा हूँ मैं।।


हर वक़्त अपने हालात पर रोता रहा हूँ मैं,
जो था ही नही वो बोझ भी ढोता रहा हूँ मैं,
नासमझ था जो जी नही जिंदगी हँसकर मैंने,
खुदा की बख्शी नेमत को खोता रहा हूँ मैं।।