बरसने दो आज इस आकाश को
छा जाने दो घनघोर घटायें,
वृहद्-सूक्ष्म कुछ नज़र न आयें।
हो जाये दिन रात-सा काला
घट जाये भले रोशनी का प्याला।
मन उजियारे को तरसने दो...
मेघ को बरसने दो, मेघ को बरसने दो....
आ जाने दो प्रलय प्रचंड को
फट जाये बादल का सीना,
बह जाने दो अंतर्मन को
धुल जायेगा मन का मलीना।
भावनाओं को अब न सरकने दो...
मेघ को बरसने दो, मेघ को बरसने दो....
- अंकित दुबे