तुमसे ना मिलना हुआ ना ही कोई बात हुई
नही कोई जान पहचान सिर्फ किरदारों से मुलाक़ात हुई।
फ़िर क्यों आज दिल बैठ गया आंखे नम हैं
तुम जैसे गए इस बात का सभी को ग़म है
वक़्त की किताब पर ना जाने कितने कोरे पन्ने थे
अभी जिन पन्नों में तुमको सपनों के रंग भरने थे
शायद ज़िन्दगी से थक कर तुमको सुकून पाना था
दुनिया में आए थे तो एक ना एक दिन तो जाना था।
तुम्हारे एक फैसले ने रुख ज़िन्दगी का हमारे मोड़ दिया
तुम्हारे यूं चले जाने ने हम सबके दिलों को तोड़ दिया।
अंकित दुबे


