सोचता हूँ कितने ख़ुशनसीब होते है
ये जूतें, जो हमेशा जोड़े में रहते है।
एक साथ चलते
एक साथ उतारे जाते
एक बार जिसके साथ जोड़ा बना,
तो बस पूरी ज़िंदगी उसका साथ देते।
गर दोनों में से एक का भी सफ़र रुका
तो दूसरा उसके वियोग में चलना छोड़ देता है।
कितने ख़ुशनसीब हैं ये जूतें
क्योंकि ये इंसां नहीं हैं।।