उसकी दुआओं का कैसा असर हो चला है
दिल का दरियाँ, अब समंदर हो चला है
कोई फ़र्क़ नहीं अब हालातों में
जो हाल इधर है , वही अब उधर हो चला है
कितने अरमानों से दर पे आया था मगर
अब तो ख़ुदा भी, पत्थर हो चला है
उसकी तस्वीर दिल के घर को मंदिर बनाती थी
अब क़ैदख़ाने में तब्दील ये घर हो चला है
कैसे अब कोई मुझे मिला दे उससे
अब तो मेरा दिल भी मुझसे अलग हो चला है
~ Akash Choudhary


