कितना मैं नादान थातेरी चाहत से अनजान थातुझे चाहिए था महल ताज काऔर टूटा मेरा मकान था।
कितना मैं नादान थातेरी चाहत से अनजान था
तुझे चाहिए था महल ताज काऔर टूटा मेरा मकान था।