फिर एक नया रिश्ता बना रहे हो तुम
इतना हौसला कहा से ला रहे हो तुम
तुम्हें मालूम है अंजाम-ए-इश्क क्या है
फिर भी इश्क किये जा रहे हो तुम
ये दिल को कोई तवायफ़ का कोठा नहीं
क्यों हर किसी को इसमें ला रहे हो तुम
- आकाश चौधरी

फिर एक नया रिश्ता बना रहे हो तुम
इतना हौसला कहा से ला रहे हो तुम
तुम्हें मालूम है अंजाम-ए-इश्क क्या है
फिर भी इश्क किये जा रहे हो तुम
ये दिल को कोई तवायफ़ का कोठा नहीं
क्यों हर किसी को इसमें ला रहे हो तुम
- आकाश चौधरी