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वक़्त के आग़ोश में....

कुछ हवाएं रुख बदल रही है
कुछ परिंदों ने भी आशियाँ बदला है
कुछ उन्मुक्त गगन के बदले है तेवर
कुछ अजनबी मुसाफिरों ने फिर अंदाज़ बदला है
एक नाव ख्वाहिशों की फिर हिचकोले ले रही है
जाना है किस और कोई नही जानता फिर
कुछ नदियों के मुहाने पर समुंदर सा तूफान सम्भला है
यह जज़्ब हो रही सिसकियां वक़्त के आग़ोश में
बेवज़
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