कल इंसान की बोटिया बिकती देखी

लाशों पे रोटियां तमाम सिकती देखी

आंखे नम सब तन्हा ,सब यहां परेशान

ना साथ है देवता कोई, ना दिखते इंसान

ता उम्र समेटे थे ,जो भी सबने रिश्ते

वक़्त की छत से ,देखे टप टप रिस्ते

खुद बचाने की होड़ में

हर कोई दौड़ा दौड़ में

मां बहन क्या बेटा बेटी

क्या साथी क्या दोस्त

सभी मगर ,ये सफर अकेला

सुनते थे दुनिया ईक मेला