मजबूरियां दिल की थी , के वरना हम कहां रोते थे
अंधेरों ने घेरा अचानक ,के वरना हम कहां खोते थे
कुछ ख्वाहिशें के दम पर जिंदा हैं अब तलक दोस्तों
गर ये भी नहीं होतीं , के हम भी फिर कहां होते थे