कोई तो बात होगी पैग़ाम उधर से आया हैअपने अल्फाजों को उसने कैसे सजाया हैमुझे भंवर में छोड़ के जाने वाले ने अचानकन जाने के किस बात पे ये हाथ बढ़ाया है
कोई तो बात होगी पैग़ाम उधर से आया हैअपने अल्फाजों को उसने कैसे सजाया है
मुझे भंवर में छोड़ के जाने वाले ने अचानकन जाने के किस बात पे ये हाथ बढ़ाया है