
तेरे आने में..
और मेरा हो जाने में..
मेरे ही रंग में तेरा रंग जाने में..
फिर एक दिन अचानक तेरा बिन बोले चले जाने में..
थोड़ा खोया है, थोड़ा खुद को पाया है मैंने।
उन बरसती बूंदों में..
और भीग जाने में..
रंगों में बसन्त हो जाने में फिर एक दिन
अचानक पतझड़ सा उदास हो जाने में..
थोड़ा खोया है, थोड़ा खुद को पाया है मैंने।
उस एक गली मे
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