सूरज उतर भी जाये, तब भी न दिन ढलता है। चाँद जब जलता है, तो गलियों में टहलता है। समंदर का वो किनारा, कहानियां सुन के भी! खामोश तो रहता है, लेकिन वो पिघलता है। मिजाज शहर का भी, तेरे ही तोे जैसा है। तू चूक भी जाये तो, तेरा शहर बहुत छलता है।