तेरी तस्वीर के ज़रिए देखता हू रोज तुझे
एक दफा नही हज़ार दफा देखता हू तुझे
कुछ तो बात है तेरी मुस्कान में .....
कुछ तो बात है तेरी मुस्कान में!
देखते ही सारे गम भूल जाता हू मेरे
माना कभी देखा नहीं है तुझे
ना सुनी तेरी आवाज़ कभी .........
माना कभी देखा नहीं हैं तुझे
ना सुनी तेरी आवाज़ कभी!
पर बस इतना सा ही हू चाहता
कि जब भी सुनु आवाज़ तेरी हो नाम उसपे मेरा!
तेरी आवाज़ में नाम मेरा शायद सबसे मीठा लगे
मेरी माँ के बाद शायद तू ही शायद मुझे प्यार से बुलाए
यही कल्पना रोज़ाना मैं हज़ार बार करता हू
शायद यही वजह हैं की तुझे खोने से डरता हू
तुझे खोने से डरता हू .....


