भोरे उजासे
ताशे बताशे
मटके पर ढफली
भूखे चाहे प्यासे
बाजो रे बाजो
दुःख भर तो बाजो ...
पांवे बेवाई
बोले तो माई
आँखन में पानी
सपना का आई
देखो रे देखो
दुःख भर तो देखो...
सेर भर आटा में
दिन भर खटाई
आधा पेट रोटी
आग कईसे बुझाई
काटो रे काटो
दुःख भर तो काटो...
-अबरार