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पीड़ित इश्क़


फूलों में आग सी लगा जाती है,तेरी याद जब भी तड़पती है।

कर रहा होता हूं भीड़ में पंचायती,तेरी यादें पूरी तरह पीड़ित व्यक्ति बना जाती है।

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